Rajasthan Travel: आभानेरी घूमने के बाद बीकानेर को भूल जाएंगे, सर्दियों में आप भी घूमने पहुंचें

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Rajasthan Hidden Places: राजस्थान के रेगिस्तान में स्थित आभानेरी एक ऐसी जगह है, जहाँ घूमने के बाद आप कई मशहूर स्थानों को भूल सकते हैं।

आभानेरी क्यों प्रसिद्ध है: राजस्थान भारत का एक प्रमुख और खूबसूरत पर्यटन राज्य है। इसे राजाओं की भूमि के रूप में भी जाना जाता है।

राजस्थान एक ऐसा राज्य है, जहाँ न सिर्फ देश के बल्कि विदेशों के पर्यटक भी घूमने और आनंद लेने आते हैं। यहाँ बहुत से पर्यटक खास तौर पर शाही मेहमान नवाजी का आनंद लेने पहुंचते हैं।

आपने राजस्थान के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जैसे जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, जैसलमेर या बीकानेर का नाम तो सुना ही होगा, लेकिन आभानेरी के बारे में शायद ही सुना होगा। राजस्थान के रेगिस्तान में स्थित आभानेरी किसी बेहतरीन पर्यटन स्थल से कम नहीं है।

इस लेख में हम आपको आभानेरी की विशेषता और यहाँ की कुछ खूबसूरत जगहों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। सर्दियों में यहाँ घूमने का अपना ही आनंद है।

आभानेरी क्यों प्रसिद्ध है?

राजस्थान के दौसा जिले से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित आभानेरी एक ऐतिहासिक और खूबसूरत स्थल है, जिसे मध्यकाल में “आभा नगरी” के नाम से जाना जाता था। यह स्थान अपनी प्राचीन संरचनाओं, महलों, किलों, बावड़ियों और प्रसिद्ध मंदिरों के कारण जाना जाता है। यहाँ हर साल होने वाला “आभानेरी उत्सव” भी पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है और इसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग यहाँ आते हैं।

आभानेरी में घूमने की प्रमुख जगहें

आभानेरी में कई ऐतिहासिक और शानदार स्थान हैं, जो पर्यटकों को खासा आकर्षित करते हैं। राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से यहाँ बड़ी संख्या में लोग घूमने आते हैं, खासकर सर्दियों में, क्योंकि मई से जुलाई तक यहाँ का मौसम बेहद गर्म होता है।

चांद बावड़ी

आभानेरी की सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक जगहों में “चांद बावड़ी” का नाम सबसे पहले आता है। यह केवल आभानेरी ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान की सबसे पुरानी और लोकप्रिय संरचनाओं में से एक है। इसे दुनिया की सबसे गहरी बावड़ियों में भी माना जाता है।

इस रहस्यमयी ढांचे का निर्माण उस समय में एक बड़ी उपलब्धि थी। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि इसका निर्माण ताज महल से भी पहले हुआ था। इसका नाम चाँद बावली, राजा चांद के नाम पर रखा गया था।

कुछ लोग यह भी कहते हैं कि भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण जी, राजा चांद के पूर्वज थे, लेकिन इस तथ्य की पुष्टि के लिए कोई ठोस सबूत उपलब्ध नहीं है।

इसका पार्श्व बरामदा और प्रवेश मंडप इसकी मूल योजना का हिस्सा नहीं थे; इनका निर्माण बाद में करवाया गया था। उन दिनों आभानेरी के लोग यहाँ गर्मी से राहत पाने आते थे, क्योंकि बावड़ी के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में लगभग 5 डिग्री कम रहता था।

कहा जाता है कि इसका निर्माण 9वीं शताब्दी में निकुंभ वंश के राजा चांदा द्वारा जल संरक्षण और गर्मी से राहत देने के उद्देश्य से किया गया था। इस बावड़ी में ऊपर से नीचे तक लगभग 3500 सीढ़ियाँ हैं, आप चौंक गए होंगे, और मुझे भी हैरानी हुई जब मुझे पता चला कि इसमें कुल 3500 सीढ़ियाँ हैं। इन सीढ़ियों का ऐसा संयोजन है जो इसे एक अनोखा रूप देता है। यहाँ पर विभिन्न कोणों से कई सुंदर तस्वीरें खींची जा सकती हैं।

बावली के पास खड़े होकर मैंने नीचे देखा। पानी की सतह पर हरी काई की परत और कबूतरों की फड़फड़ाहट, और इसका शांत माहौल आपको प्राचीन काल की झलक देने का एहसास कराता है।

इस बावली में कुल 13 मंजिलें हैं, और इसकी आकृति ऊपर से नीचे की ओर धीरे-धीरे संकरी होती जाती है। यह सममित रूप से बनी हुई है, जो इसे और भी आकर्षक बनाती है।जो इसकी भव्यता को और बढ़ाती हैं। इसकी अनोखी वास्तुकला पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है।

हर्षत माता मंदिर (Harshat Mata Temple)

चांद बावड़ी से थोड़ी ही दूरी पर स्थित हर्षत माता मंदिर एक प्राचीन और लोकप्रिय मंदिर है। यह मंदिर स्थानीय देवी हर्षत माता को समर्पित है और इसका इतिहास 3000 वर्षों से अधिक पुराना माना जाता है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, हर्षत माता का यह मंदिर शहर की रक्षा करता है। कहा जाता है कि इसकी अद्भुत वास्तुकला ने कई आक्रमणकारियों को लूटने के लिए प्रेरित किया था। यह मंदिर दिनभर पर्यटकों के लिए खुला रहता है, और इसके आसपास की प्राकृतिक सुंदरता सभी को मोहित कर देती है।

हर्षत माता मंदिर का इतिहास

हर्षत माता मंदिर के निर्माण की सटीक तिथि ज्ञात नहीं है। इतिहासकारों के अनुसार, यह मंदिर चांद बावली के निर्माण के आसपास ही बनाया गया था। इसे निकुंभ राजवंश के राजा चांद ने 8वीं-9वीं शताब्दी के दौरान बनवाया था।

हर्षत माता मंदिर की वास्तुकला

महामेरू शैली में बना यह पूर्व दिशा की ओर मुख किए हुए मंदिर थोड़ी ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर की योजना में पंचरथ गर्भगृह है, और इसके सामने स्तंभों पर आधारित एक मंडप है। अब केवल मुख्य गर्भगृह और एक खुला मंडप ही सही स्थिति में बचे हुए हैं।

मंदिर का ऊपरी हिस्सा एक समय भव्य रहा होगा, लेकिन हमले के बाद इसे गुंबद के आकार में बना दिया गया। बाहरी दीवारों पर विभिन्न ताखों में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ उकेरी गई हैं।

मंदिर के गर्भगृह में हर्षत माता की मूर्ति विराजमान है। जगती के चारों ओर ताखों में रखी सुंदर मूर्तियाँ धार्मिक और लौकिक दृश्यों को प्रस्तुत करती हैं, जो इस मंदिर की विशेष पहचान हैं।

आभानेरी उत्सव (Abhaneri Festival)

इतिहासिक बावड़ी और हर्षत माता मंदिर के अलावा आभानेरी की सबसे खास पहचान है इसका आभानेरी उत्सव। हर साल अक्टूबर में आयोजित होने वाले इस उत्सव को देखने के लिए देशभर से पर्यटक आते हैं।

आभानेरी उत्सव में आप राजस्थानी नृत्य, संगीत और नाटक का आनंद ले सकते हैं, जिसमें घूमर नृत्य विशेष आकर्षण होता है। इस अवसर पर कई खरीदारी स्टॉल भी लगते हैं, जहां से आप स्मृति चिन्ह खरीद सकते हैं। इसके अलावा, ऊंट की सवारी का भी अनुभव ले सकते हैं।

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